दोषियों पर कार्रवाई के लिये संचालक मण्डल ने की कलेक्टर से मुलाकात

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सीधी। जय किसान ऋण माफी योजना में अपात्रों को वितरण किये गये ऋण की माफी कराये जाने के मामले केा लेकर सेवा सहकारी समिति मर्यादित भरतपुर के अध्यक्ष एवं संचालक मण्डल के सदस्यों ने विगत दिनों कलेक्टर से मिलकर सभी दोषियों के विरूद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराने की मांग की। जिस पर कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच राजस्व अमला से कराने व सभी दोषियों के विरूद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराने का आश्वासन दिया। समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह ने कलेक्टर केा फर्जी ऋण प्रकरण से संबंधित दस्तावेज सौंपते हुये बताया कि उक्त पूरे प्रकरण में केवल तत्कालीन समिति प्रबंधक गया प्रसाद शुक्ला ही दोषी नही हैं बल्कि अन्य लोग भी इसमें मुख्य रूप से दोषी हैं। समिति अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2008 में तत्कालीन समिति प्रबंधक आनंद सिंह द्वारा भूमिहीन व्यक्तियों के नाम ऋण प्रकरण स्वीकृत किया था। उसी ऋण प्रकरण को नया प्रकरण बनाने का काम गया प्रसाद शुक्ला द्वारा किया गया था। जबकि ऋण माफी योजना में फर्जी तरीके से वितरण किये गये ऋणियों का नाम तत्कालीन समिति प्रबंधक राजेश्वरी सिंह द्वारा जिला प्रशासन को भेजा गया था। सहकारिता विभाग द्वारा जांच के दौरान जिन व्यक्तियों को भूमिहीन बताया गया था उन्हीं व्यक्तियों के नाम समिति प्रबंधक राजेश्वरी सिंह द्वारा कर्जमाफी योजना में शामिल कर लाभांवित किये जाने का प्रयास किया गया है। समिति अध्यक्ष ने बताया कि उक्त मामले में तत्कालीन अध्यक्ष अश्विनी प्रसाद त्रिपाठी एवं तत्कालीन अध्यक्ष अनीता चतुर्वेदी की भी सहभागिता रही है। इस कारण तत्कालीन समिति प्रबंधक आनंद सिंह, राजेश्वरी सिंह व तत्कालीन समिति अध्यक्ष अश्विनी त्रिपाठी, अनीता चतुर्वेदी सहित 11 भूमिहीन व्यक्तियों के विरूद्ध भी पुलिस प्रकरण दर्ज किया जाय। अर्जुन सिंह ने बताया कि गया प्रसाद शुक्ला ने पुराने स्वीकृत प्रकरण को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उनके द्वारा कोई नये अपात्र किसानों के प्रकरण स्वीकृत नही किये गये हैं। जानबूझकर सीईओ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा मुख्य दोषियों को बचाने के उद्देश्य से गया प्रसाद शुक्ला को मोहरा बनाया गया है। जिन भूमिहीनों के नाम ऋण स्वीकृत किया गया है उनमें शशिकला पति रामरहीस त्रिपाठी ग्राम खरहना रकवा 1.5 हे. राशि 72150, अरूण बैस पिता अयोध्या बैस भैंसरहा रकवा 2.65 हे. राशि 87000, रमा पाण्डेय पति राकेश पाण्डेय ग्राम सगौनी रकवा 2.75 हे. राशि 78395, रश्मि पाण्डेय पति सतीश पाण्डेय सगौनी रकवा 2.75हे. राशि 78000, अनीता चतुर्वेदी पति नागेन्द्र चतुर्वेदी ग्राम अमिलई रकवा 2.75 हे. राशि 31620, प्रकाश पाण्डेय पिता गणेशमणि पाण्डेय ग्राम सगौनी रकवा 2.8 हे. राशि 108221, हरीश पाण्डेय पिता श्यामसुंदर पाण्डेय सगौनी रकवा 2.8हे. राशि 92000, सुनीता पाण्डेय पति हरीश पाण्डेय ग्राम सगौनी रकवा 2.8 हे. राशि 92000, सतीश पाण्डेय पिता श्यामसुंदर पाण्डेय ग्राम सगौनी रकवा 2.8 हे. राशि 94300 एवं संतोष पिता लालबहादुर ग्राम सगौनी रकवा 2.8 हे. राशि 62000 शामिल है।
दोषी पाये गये थे राजेश्वरी
कलेक्टर के निर्देश में सहकारिता विभाग द्वारा की गई जांच एवं प्रस्तुत प्रतिवेदन में यह लेख किया गया था कि भूमिहीन कृषकों को फर्जी ऋण वितरण किये जाने के लिये तत्कालीन समिति प्रबंधक गया प्रसाद श्ुाक्ला दोषी पाये गये साथ ही वर्तमान समिति प्रबंधक राजेश्वरी सिंह के द्वारा ऋण माफी सूची मे ंनाम दर्ज किये जाने के दोषी पाये गये। राजेश्वरी सिंह द्वारा भूमिहीनों के नाम के सम्मुख ऋणमाफी सूची में भूमि का रकवा मनगढ़ंत रूप से दर्ज कर सूची तैयार की गई है जिसके लिये श्री सिंह ही उत्तरदायी हैं। जांच प्रतिवेदन में राजेश्वरी सिंह के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना उचित होगा का भी लेख किया गया था। किंतु उनके विरूद्ध सीईओ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और सारा उत्तरदायित्व गया प्रसाद शुक्ला पर डाल दिया गया।
सीईओ की भूमिका संदिग्ध
जिला केन्द्रीय सहकारी बैेंक में पदस्थ सीईओ ज्ञानेन्द्र पाण्डेय द्वारा फर्जी ऋणमाफी योजना के दोषियो ंको बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उक्त संबंध में जानकारी देते हुये समाजसेवी आदित्यनारायण सिंह ने बताया कि सेवा सहकारी समिति भरतपुर के द्वारा भूमिहीन किसानों को ऋण वितरण किये जाने की शिकायत मेरे द्वारा सीएम हेल्पलाइन पीजी क्रमांक 304589/2014 में की गई थी। जिसकी जांच तत्कालीन सीईओ ज्ञानेन्द्र पाण्डेय द्वारा कराई गई थी तथा जांच के दौरान शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाये जाने पर सीईओ द्वारा शासन को प्रतिवेदन भेजा गया था कि दोषियों पर कार्रवाई प्रचलन में है। चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक सीईओ द्वारा कार्रवाई प्रचलन में ही रखी गई है और दोषियों को बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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