हर पुरुष अत्याचारी नहीं ,हर महिला बेचारी नहीं -प्रीति सिंह चौहान

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सीधी एक्सप्रेस न्यूज़

सीधी ।एक महिला होते हुए तमाम महिलाओं को अवगत कराना चाहती हूं कि हम सबको अब इज्ज़त की उम्मीद दूसरों से बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए बल्कि उसे स्वयं के बलबूते अर्जित करना चाहिए..घर में,परिवार में,समाज में,कार्यक्षेत्र में हर जगह,अब शुरुआत इज्ज़त देने की है स्वयं को…लेकिन मै तमाम महिलाओं से यह गुजारिश करना चाहूंगी कि आप सब समाज में सम्मान के हकदार तभी होंगे जब आप सब भी अपना पूरा सहयोग दे स्वयं के लिए…“हर पुरुष अत्याचारी नहीं और हर महिला बिचारी नहीं” नित नए ऐसे मामले देखने को मिलते है जिसमें औरते यह कहकर पुरुषों पर आरोप लगाती है कि हमारे साथ गलत हुआ.. हमें बहलाया गया फुसलाया गया पुरुषों द्वारा…अरे मैडम जी ऑटो वाला आपसे 5₹ ज्यादा नहीं ले पाता क्युकी आप जागरूक है,सब्जी वाले से आप भर भर के मोल भाव कर लेती है फिर यहां पर आप क्यों अपने प्रति सजग नहीं थी…मेरा यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि सारी महिलाएं ऐसे झूठे आरोप लगाती है या सारे पुरुष दूध के धुले हुए है …मै सिर्फ समझाना यह चाहती हूं कि फसाया सिर्फ औरतों को नहीं बल्कि पुरुषों को भी जाता है कभी बदले की भावना से तो कभी जैसा हम चाहते है अगर वैसा न हुआ तो…मेरा आप सबसे निवेदन है सजग बनिए,सरल बनिए…खुश रहिए ,खुश रहने दीजिए।
बात अगर दहेज की करे ये भी समाज की एक मानसिक बीमारी है …दहेज लड़के लेते है बिल्कुल सही बात है लेकिन उन्हें देता कोन है मैंने कई लड़कियों को देखा है वो हमेशा लेने वालो को कोसते रहते है देने को मना करने के लिए आप आगे क्यों नहीं आती है क्यों अपने मां बाप का ढाल नहीं बनती है…समाज में बुराइयां है लेकिन अगर हम उनको समाप्त करने की कोशिश नहीं करेंगे तो इसका मतलब यही है कि हम उसे खुद बढ़ावा दे रहे है प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से…जो गलत है वो गलत है और उसके लिए आवाज उठानी चाहिए मेरे हिसाब से यही जागरूकता है।
धन्यवाद ,प्रीती सिंह चौहान

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