कमिश्नर डॉ. भार्गव ने मुख्यमंत्री प्याज कृषक योजना के क्रियान्वयन के संबंध में दिये दिशा निर्देश

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सीधी |,,,कमिश्नर रीवा संभाग डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने संभाग के सभी जिला कलेक्टर्स एवं संबंधित अधिकारियों को मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में किसान प्याज की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। मध्यप्रदेश अग्रणी प्याज उत्पादक राज्य है। नमी से शीघ्र प्रभावित होने के कारण किसानों को प्याज बिक्री के लिये कम समय मिलता है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना के तहत पंजीकृत किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ दिया जायेगा। योजना के तहत किसानों के पंजीयन के लिए अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित की गई है। किसान शासन द्वारा निर्धारित कृषि उपज मण्डी में अपने भूमि के विवरण तथा बोये गये प्याज के रकबे की जानकारी, आधार पंजीयन, समग्र आईडी, बैंक खाते की जानकारी तथा मोबाइल नम्बर के साथ आवेदन करके पंजीयन करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना के तहत पंजीकृत किसानों से एक जून से 30 जून तक निर्धारित कृषि उपज मण्डी में बनाये गये खरीदी केन्द्रों में प्याज की खरीद की जायेगी। किसानों को आठ सौ रूपये प्रति क्विटल से कम विक्रय मूल्य प्राप्त होने पर इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। शासन द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए प्याज का आठ सौ रूपये प्रति ड्डक्वटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इस योजना का लाभ मध्यप्रदेश के सभी मूल निवासी किसानों को दिया जायेगा। केवल स्वयं की जमीन अथवा वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टाधारी किसान ही योजना के लिए पात्र होंगे। इस योजना के लिए 250 क्विटल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन निर्धारित किया गया है। इस उत्पादकता के आधार पर अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए किसान को अन्तर राशि का प्रोत्साहन लाभ दिया जायेगा।
इस योजना का लाभ कृषि उपज मण्डी में प्याज की बिक्री करने पर ही प्राप्त होगा। मण्डी में की गई बिक्री की अनुबंध पर्ची, प्रवेश पर्ची तथा तौल पर्ची को भुगतान पत्रक में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जायेगा। पंजीकृत किसानों का सत्यापन करके उनके बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जायेगा। सौदा पत्रक के माध्यम से बेची गई प्याज में इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। योजना का लाभ प्राप्त करने वाले किसानों को मण्डी की ओर से प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जायेगा। पंजीकृत किसान प्रदेश की किसी भी अधिसूचित मण्डी में अपनी प्याज की बिक्री कर सकता है। लेकिन उसे भुगतान उसी मण्डी से प्राप्त होगा जहां किसान ने अपना पंजीयन कराया है। इस योजना की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति नियमित रूप से इस योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी।

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