सीधी,सतगुरू के माध्यम से ही होती है परमात्मा के प्रेम की प्राप्ति, बाला व्यंकटेश महाराज

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सीधी एक्सप्रेस न्यूज
सीधी। स्थानीय पूजा पार्क में बुधवार 08 जनवरी 2020 को श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा अमृत पान करने हेतु भक्तों की भींड आतुर दिखी। कथा प्रारंभ के पूर्व व्यास पीठ पर शुसोभित पं. बाला व्यंकेटेश महाराज का भक्तों के द्वारा अभिषेक एवं पुष्प माला अर्पित कर विध विधान के पूजा अर्चना की गई। कथा के मंगलाचरण में व्यास महाराज ने कहा कि कथा की संगत भक्तों को परमात्मा प्राप्ति में साधक बनती है, जो कि मानव जीवन को महान बना देती है। संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्तों को संबोधित करते हुए देश एवं प्रदेश के लोकप्रिय कथा प्रवक्ता पंडित वाला व्यंकटेश महाराज ने आत्मा और परमात्मा के बीच बने भ्रम के पुल को तोड़ा और प्रमाण सहित बताया कि दोनों एक ही हैं, आवश्यकता है तो केवल सत्य असत्य, संदेह भ्रम, आत्मा और परमात्मा के गुढ़ रहस्य को हम सब समझे और जाने जिसके माध्यम से हम इस जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो सकें।
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गुरू की महिमा है अपरमपार –
बाला व्यंकटेश महाराज द्वारा बताया गया कि अंनत कोटी ब्रह्मंड में आनंद कंद भगवान श्याम सुंदर की भगवत कथा के सहारे ही रसिक जन भवसागर से पार पा सकते हैं। प्रभु भक्तों की रक्षा हेतु हर रूप में खुद ही दौड़े चले आते हैं, आवश्कता है तो केवल उस प्रेम और विश्वास की जिसके सहारे परीक्षित की रक्षा हुई। इस इस लोक में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जब भक्त के बुलाने पर प्रभु दौड़े चले आते हैं, ये अलग बात है कि हम सब उन्हे नहीं देख पाते हैं पर प्रभु अपने भक्तों को निरंतर देखते रहते हैं और भक्तों पर कृपा दृष्टि निरंतर बनी रहती है। हम सब यहॉ मौजूद हैं तो सिर्फ प्रभु की कृपा का प्रमाण है। मानव मात्र की हर क्रिया श्रीकृष्ण की कृपा पर ही निर्भर है। हम सब बड़भागी है, बड़े भाग्य से मनुष्य का यह तन हम सब को प्राप्त हुआ है। इस तन की सच्ची सार्थकता तब साबित होगी जिस दिन हम सब भगवान के प्रेम को प्राप्त करेगें अन्यथा यह जन्म निर्थक हैं। धर्म की दृष्टि से देखा जाये तो कुल चार प्राकर के बड़भागी होते हैं, पहला बड़भागी, दूसरा परम बड़भागी, तीसरा अति बड़भागी और चौथ अतिशय बड़भागी। देवी अहिल्या बड़भागी हैं, परम बड़भागी राम की सेवा में अपने आप को समर्पित करने वाले वीर हुनमान हैं, तभी तो कहा गया है कि हनुमान सम नही बड़भागी। सबसे खास बात तो यह है कि सर्व प्रथम सतगुरू संत मिलते हैं उसके बाद ही प्रभु का प्रेम स्नेह और मन मंदिर में दर्शन प्राप्त होता हैं। प्रभु का प्रेम दिलाने हेतु गुरू माध्यम के रूप में परीक्षित को सुकदेवजी मिलें, ध्रव जी को नारद जी, और प्रहलाद जी को भी नारद जी गुरू के रूप में मिले और आत्मा का परमात्मा से मिलान करायें। गुरू की महिमा अपरमपार है, जिसे समझने के लिये सतसंग परम आवश्यक है। जिसके जीवन में सतगुरू प्रवेश कर जाये समझ लेना प्रभु का प्रेम मिल गया है।
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सत्संग चार प्रकार –
व्यास पीठ द्वारा बताया गया कि सत्संग भी चार प्रकार के होते हैं, मन का, मौन का, मोहन का, जहॉ परामात्मा की गोद में आप सब बैठे हैं। आत्मा में परमात्मा का वास होता ह,ै आत्मा और परमात्मा दो नहीं एक ही हैं जैसे प्रयाग में बहने वाली गंगा जल जब हम अपने घर में डिब्बे लाकर घर में रखते हैं तो क्या गंगा का मूल खत्म हो जाता नहीं बिल्कुल दोनो एक ही हैं।
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माल्यापर्ण कर हुआ बंदन –
कथा के प्रारंभ में व्यासपीठ एवं कथा व्यास महाराज पंडित वाला व्यंकटेश का माल्यार्पण से स्वागत कथा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष गणेश सिंह चौहान डेम्हा, श्रीमती कुमुदिनी सिंह, बाबूलाल सिंह पिपरोहर, संजय संतोषी सिंह, संतोष माधुरी सिंह, विकास शर्मा, समाज सेवक संजीव मिश्रा रहीश, सहित आदि भक्तों ने किया। वहीं मंच का सफल संचालन चिंतक विचार अंजनी सिंह शौरभ करते हुए बतायें कि यह कथा निरंतर 12 जनवरी तक पूजा पार्क में दोपहर 02 बजे से निरंतर की जायेगी।
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