सीधी जिले में हॉथ ठेले से कोशों दूर तक ले गये शव,सरकारी सिस्टम पर उठा सवाल,जिले में मानवता हुई शर्मसार

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। सीधी
प्रदेश में सरकार तो बदली पर स्वास्थ्य व्यवस्था का बदहाल आलम जस का तस बना हुआ है। बीते रविवार को सरकारी सिस्टम पर सवाल उठाती तस्वीरें सामने आई हैं जो मानवता को भी झकझोर कर रख रही हैं।रविवार को जिले में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जहॉ प्रशासनिक लचर व्यवस्था के चलते मानवता शर्मसार हुई है। बताया गया कि जिले में समाज सेवा के दो आयामों पर काम होता है अगर कोई व्यक्ति सक्षम है, धनवान है या फिर ऊॅची राजनैतिक पकड़ रखता है तो उसके लिये मदद हेतु सारे दरवाजे खुले रहते हैं, वहीं अगर कोई व्यक्ति निर्धन है, दीन हीन है तो उसके लिये खुले दरवाजे भी बंद हो जाते हैं। ऐसी ही एक घटना सामने आयी है जहॉ सुनने व देखने वालों के ऑखों से ऑसू बह चले, साथ ही इस घटना ने प्रशासन के सारे दावों की पोल खोल कर रख दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक एक वृद्ध द्वारा अपने परिजन का शव जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सोन नदी तक हॉथ ठेले से ले जाया गया।

चिता की लकड़ियों के पैसे ना होने पर नदी में बहाया शव

इस घटना में गरीबी की इंतहा होने का नजारा ये रहा कि मृतक के गरीब परिजन दाह संस्कार हेतु लकड़ी खरीदने में असमर्थ होने की दशा में शव को सोन नदी में प्रवाहित कर दिये। परिजनों ने नगर पालिक प्रसासन एवं स्वास्थय विभाग से शव वाहन माँगने के वावजूद भी वाहन नहीं देने का आरोप लगाया है। वहीं जिले में इस प्रकार की घटना घटित होना कि असमर्थता के चलते दाह संस्कार की जगह हिन्दू रीति रिवाज से हटकर शव को सीधे सोन नदी में ही प्रवाहित करना समाज सेवक व समाज के ठेकेदारों पर करारा तमाचा जैसा प्रतीत हो रहा है।

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