चार मांह से पुलिस प्रताड़ना का दंश भोग रहा कमलेश कोल,

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सीधी एक्सप्रेस न्यूज़

सीधी। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाई गई पुलिस रसूख दारे के इशारे पर काम करने लगी है अपराधियों के अपराध पर पर्दा डालने के साथ-साथ उनके सहयोग ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लगी है यहां तक कि फरियादी को पीट-पीटकर विकलांग बना देती है ऐसा ही मामला रामपुर नैकिन थाना के खड्डी चौकी अंतर्गत धनहा के टोला का सामने आया है जहां से रसूखदार राजेंद्र तिवारी के इशारे पर आदिवासी कमलेश कोल को पुलिस घर से उठा ले गई और मार-मार कर उसका पैर तोड़ दिया जब वह अचेत हो गया तो उसे रामपुर नैकिन स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार कराने के बाद जिला अस्पताल से ही भेज दिया गया वहां भी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने रीवा भेज दिया लेकिन पीड़ित के पिता रीवा ले जाने की वजाय सिंगरौली के बैढंन हॉस्पिटल में ले जाकर भर्ती कराया जहां 2 महीने तक लगातार उपचार के बाद थोड़ी सी राहत मिले हो यहां से छुट्टी मिलने के बाद घर में रखा गया है। प्रताड़ित आदिवासी कमलेश कोल 4 माह बीत जाने के बाद भी चलने फिरने में असमर्थ है पीड़ित का पिता थाना से लेकर पुलिस अधीक्षक तक न्याय की गुहार लगा चुका है लेकिन उसे न्याय और उपचार नहीं मिल पा रहा है। पीड़ित के पिता के अनुसार कमलेश कोल का गांव के राजेंद्र तिवारी नाम के व्यक्ति से जमीन का मामूली भेजा था जिसको लेकर राजेंद्र तिवारी उससे नाराज चल रहे थे 20 मई को जब कमलेश अपने घर में था तभी राजेंद्र तिवारी 100 नंबर को फोन करके बुला लिया और घर के भीतर से उसे लेकर चौकी चल दिए जहां रास्ते में पुलिस और राजेंद्र तिवारी ने गाड़ी में रखे लोहे की रॉड से पैर को दो जगहों से तोड़ दिया गया मारपीट में जब कमलेश गंभीर रूप से घायल हो गया तो उसे रामपुर नैकिन स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां चिकित्सकों ने देखते हुए जिला चिकित्सालय के लिए रिफर कर दिया था जिला चिकित्सालय पहुंचने पर चिकित्सकों ने भर्ती किए बिना ही रीवा के लिए रेफर कर दिया था लेकिन कमलेश के परिजनों के पास उपचार का इंतजाम नहीं था रिश्तेदारों के माध्यम से सिंगरौली जिला अस्पताल में डॉक्टर आरपी सिंह से संपर्क करके उपचार के लिए ले जाया गया जहां परीक्षण के पश्चात पैर टूटने की जहां पुस्टि की नहीं 2 महीने तक उपचार किए अव जाकर उसे छुट्टी दी गई समाचार लिखे जाने तक वह चलने की अवस्था में नहीं है पीड़ित का पिता न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।

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